स्वामी विवेकानंद जी 5 बाते जो हर किसी को सीखनी चाहिए

स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था की ये दुनिया सबसे पहले अच्छी बात का मजाक उड़ाती हैं उसके बाद उसका विरोध करती हैं और आखिर मैं जाकर उसे स्वीकार कर लेती हैं ।

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स्वामी विवेकानंद जी 5 बाते जो हर किसी को सीखनी चाहिए

आज दोस्तों हम बात करने जा रहे वो विख्यात अध्यात्मक गुरु स्वामी विवेकानंद जी के बारे बात करने जा रहे हैं उनका जन्म 12 जनवरी 1863 में हुआ था उस दिन का हम आज भी युवा दिवस रूप में मनाते हैं।

1902 में 4 जुलाई में वो परलोक गमन कर गए 39 सालो की इस जीवन यात्रा में मात्र 39 साल उन्होंने जीवन यापन किया लेकिन इन 39 सालो में इस दुनिया को देश को इतने अच्छे और शानदार विचार दिए हैं ।

दोस्तों अगर आप उनमे से किसी एक विचार को भी अपने जीवन में लागू कर ले तो शायद आपकी जिंदगी बदल जाएगी

1893 में जब उन्हें बुलाया गया था usa  में शिकागो में विश्वधर महा सभा में स्वामी विवेकानंद जी बस 2 मिनिट मिला था भाषण देने के लिए दोस्तों आप को बता दे की वो भाषण आज भी याद किया हैं ।

क्योकि स्वामी विवेकानंद जी अपने भाषण की शुरुआत की थी मेरे प्यारे अमेरिकी भाई और बहनो से ये शुरुआत के शब्द जो पंक्ति थी इन्होने सबका दिन जित लिया था ।

यूरोप में भारत में और अन्य देशो में अपने धर्म स्तानक धर्म की सोच हैं उसे पहुंचने के लिए स्वामी विवेकानंद जी ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी

जो की आज भी अपना काम कर रहा हैं वो अपने गुरुदेव रामकृष्ण परहंस जी के सबसे प्यारे शिष्ये थे उनसे सीखने के लिए बहुत सारी बाते पर वो बड़ी 5 बाते जो हर किसी को सीखनी चाहिए

स्वामी विवेकानंद जी 5 बाते जो हर किसी को सीखनी चाहिए

1) सबसे पहले स्वामी विवेकानद जी सिखने वाली सबसे पहली बात हैं की इंसान के अंदर दया का भाव होना चाहिए दुसरो की मदद करने का भाव होना चाहिए ।

एक कहानी हैं एक बार स्वामी विवेकानद जी की माताजी ने उनसे चाकू माँगा स्वामी विवेकानंद जी ने चाकू लेकर दिया माँ रसोई घर में कुछ काम कर रही थी जब उन्होंने चाकू जब माँ को पकड़ाया तो जो चाकू की तेज धार थी वो अपनी तरफ रखा और जो सुरक्षित हिस्सा था वो माँ को पकड़ा दिया इससे समझ में आता हैं स्वामी विवेकानंद जी कितने द्यालु एव अपने दया का भाव था ।

सबसे पहले इंसानो में इंसानियत का होना जरुरी है जो हमारे परिवार बच्चे हैं उन्हें जो काम करते हैं जो प्रोत्साहित करना की वो और भी अच्छे काम करे और जिंदगी अच्छे इंसान बने ।

2) अपने लक्ष्ये पर ध्यान लगाए

स्वामी विवेकानंद जी की बाते बहुत ज्यादा लोकप्रिय हैं उठो जागो और तब तक मत जब लक्ष्ये की प्राप्त न हो इस पर भी एक छोटी सी कहानी हैं एक बार स्वामी विकानंद जी अपने आश्रम में विश्राम कर रहे थे कहने लगा की मुझे स्वामी जी मिलना हैं बहुत जरुरी बात हैं उनसे पूछनी हैं जब स्वामी जगे तो

वो व्यक्ति उनके चरणों में गिर गया मुझे समझये की कैसे अपनी मंझिल तक पहुँचूगा मैं सफल नहीं बन पा रहा हु जो चाहता हु वो मिल ही नहीं रहा हैं तब स्वामी जी ने उस व्यक्ति से कहा की एक काम करो ये मेरा फालतू कुत्ता हैं इसे थोड़ी देर के लिए घुमा कर लाओ फिर तुम से बात करते हैं ।

वो जो व्यक्ति था उस कुत्ते को लेकर गया जब वापस आया तब स्वामी जी ने उससे 2 सवाल किये की तुम तो बिलकुल भी थके हुए नहीं लग रहे कुत्ता इतना हाफ क्यों रहा हैं उस व्यक्ति ने खा की स्वामी जी जब मैं बहार गया सीधा अपने रिश्ते पर चल रहा था थोड़ा सा घूम कर वापस आ गया

लेकिन जो आपका कुत्ता इस तरफ उस तरफ और जब कोई चीज़ देखता दौड़ने लग जाता था इसलिए ये दौड़ने की वजह से ये हाफ गया बस इसी घटना में तुम्हारे जीवन का सार हैं तुम्हे तुम्हारी मंजिल सामने दिख रही पर तुम भी उससे भटक जाते हो इस कुत्ते की तरह कभी इधर उधर कभी दूसरा टारगेट कभी तीशरे टारगेट बनाने लगते हो और जहा पहुंचना हैं जो एक चीज़ जो तो तुम दिल से चाहते हो वहा तो नहीं पहुंच पते हो ।

अगर दौड़ने लगोगे तो थोड़ी दूर में तुम हाफने लगोगे और सीधी चलोगे तो थोड़ी दूर में ही अपनी मंजिल तक पहुंच जाओगे

ये घटना भी सिखाती हैं की जिंदगी में अपने लक्ष्ये की तरफ ध्यान दो ।

कभी लगता हैं की इसने तो इस फिल्ड में अपना नाम कमा लिया मुझे भी इधर ही जाना चाहिए हम बहुत जल्द ही भटक जाते है फिर कुछ समय बाद पता चलता हैं की वो हमारे काम का नहीं था और जहा हम जाना चाहते थे वहा जाने में देरी हो गई ।

3) नारी का सम्मान

ये घटना जब स्वामी विवेकानंद जी देश विदेश में स्नातक धर्म का प्रचार कर रहे थे दूसरे देश में वहा उनसे मिलने बहुत से लोग आये थे उनके दर्शन करने आये थे

एक महिला उनके पास आयी उस देश की महिला थी जिस देश में स्वामी जी गए थे वो औरत आकर कहने लगी की मैं आपसे बहुत प्रभावित हु आपकी सोच से प्रभावित हु आप बहुत अच्छी बात करते हैं मैं आपको अपना पति बनना चाहती हु जहा उस महिला ने प्रोपोज किया शादी के लिए स्वामी विवेकानंद जी ने ऐसा कैसे हो सकता हैं मैं सन्यासी हु ।

अगर आप मुझसे प्रभावित हैं तो एक काम कीजिये पुत्र बना लीजिये इससे मेरा सन्यास भी नहीं टूटेगा और आपको मेरे जैसा पुत्र मिल जायेगा जहा स्वामी जी ने ये बात कही महिला स्वामी जी के चरणों में गिर गई कहने लगी की वाकई ही आप ईश्वर के समान हैं जो कभी भी अपने धर्म के राश्ते से विचलित नहीं होता हैं ।

4) गुरु की उपदेशक


अपने गुरु कभी नहीं भूलना चाहिए हम भूल जाते हैं की रास्ता उन्होंने दिखाया तभी मंझिल तक पहुंच पाते हैं एक स्वामी विवेकानद जी के गुरु का अंतिम समय चल रहा था और स्वामी जी के परिवार की स्थति भी कुछ नहीं नहीं थी पर स्वामी जी ने परिवार से बड़ा दर्ज़ा अपने गुरु का दिया गुरु की अंतिम श्यासो तक स्वामी जी अपने गुरु के साथ ही थे । गुरु का दरजा सबसे ऊपर होता हैं । स्वामी जी अपने गुरु के लिए जिन्दंगी भर समप्रित रहे ।

5) बुद्धिमान बनिए पर हंसी मजाक करना मत छोड़िये

क्योकि कई बार हम बहुत सीरियस हो जाते हैं जीवन में और हम भूल जाते हैं की हमें हसना हैं भी हमारी हंसी बहुत मत्वपूर्ण हैं स्वामी विवेकानंद जी एक बार विदेश एक रेस्ट्रोरेंट में डिनर कर रहे थे उनके साथ एक विदेश का एक अफसर भी बैठा हुआ था और वो कहने लगा की मैं ऐसे रेट्रोरेन्ट में खाना नहीं खाऊंगा जहा पर एक सूअर और चिड़िया साथ बैठे हो तो स्वामी जी ने कहा की मैं उड़ चला जाऊ जो ये बात उन्होंने कई वहा पर हर कोई हंसने लगा एक हंसी का माहौल बन गया ।

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